अनमोल विचार

रविवार, 6 जनवरी 2019

जनवरी 06, 2019

केदारनाथ को क्यों कहते हैं ‘जागृत महादेव’


एक बार एक शिव-भक्त अपने गांव से केदारनाथ धाम की यात्रा पर निकला। पहले यातायात की सुविधाएँ तो थी नहीं, वह पैदल ही निकल पड़ा। रास्ते में जो भी मिलता केदारनाथ का मार्ग पूछ लेता। मन में भगवान शिव का ध्यान करता रहता। चलते चलते उसको महीनो बीत गए। आखिरकार एक दिन वह केदार धाम पहुच ही गया। केदारनाथ में मंदिर के द्वार 6 महीने खुलते है और 6 महीने बंद रहते है। वह उस समय पर पहुचा जब मन्दिर के द्वार बंद हो रहे थे। पंडित जी को उसने बताया वह बहुत दूर से महीनो की यात्रा करके आया है। पंडित जी से प्रार्थना की - कृपा कर के दरवाजे खोलकर प्रभु के दर्शन करवा दीजिये । लेकिन वहां का तो नियम है एक बार बंद तो बंद। नियम तो नियम होता है। वह बहुत रोया। बार-बार भगवन शिव को याद किया कि प्रभु बस एक बार दर्शन करा दो। वह प्रार्थना कर रहा था सभी से, लेकिन किसी ने भी नही सुनी।
पंडित जी बोले अब यहाँ 6 महीने बाद आना, 6 महीने बाद यहा के दरवाजे खुलेंगे। यहाँ 6 महीने बर्फ और ढंड पड़ती है। और सभी जन वहा से चले गये। वह वही पर रोता रहा। रोते-रोते रात होने लगी चारो तरफ अँधेरा हो गया। लेकिन उसे विश्वास था अपने शिव पर कि वो जरुर कृपा करेगे। उसे बहुत भुख और प्यास भी लग रही थी। उसने किसी की आने की आहट सुनी। देखा एक सन्यासी बाबा उसकी ओर आ रहा है। वह सन्यासी बाबा उस के पास आया और पास में बैठ गया। पूछा - बेटा कहाँ से आये हो ? उस ने सारा हाल सुना दिया और बोला मेरा आना यहाँ पर व्यर्थ हो गया बाबा जी। बाबा जी ने उसे समझाया और खाना भी दिया। और फिर बहुत देर तक बाबा उससे बाते करते रहे। बाबा जी को उस पर दया आ गयी। वह बोले, बेटा मुझे लगता है, सुबह मन्दिर जरुर खुलेगा। तुम दर्शन जरुर करोगे।
बातों-बातों में इस भक्त को ना जाने कब नींद आ गयी। सूर्य के मद्धिम प्रकाश के साथ भक्त की आँख खुली। उसने इधर उधर बाबा को देखा, किन्तु वह कहीं नहीं थे । इससे पहले कि वह कुछ समझ पाता उसने देखा पंडित जी आ रहे है अपनी पूरी मंडली के साथ। उस ने पंडित को प्रणाम किया और बोला - कल आप ने तो कहा था मन्दिर 6 महीने बाद खुलेगा ? और इस बीच कोई नहीं आएगा यहाँ, लेकिन आप तो सुबह ही आ गये। पंडित जी ने उसे गौर से देखा, पहचानने की कोशिश की और पुछा - तुम वही हो जो मंदिर का द्वार बंद होने पर आये थे ? जो मुझे मिले थे। 6 महीने होते ही वापस आ गए ! उस आदमी ने आश्चर्य से कहा - नही, मैं कहीं नहीं गया। कल ही तो आप मिले थे, रात में मैं यहीं सो गया था। मैं कहीं नहीं गया। पंडित जी के आश्चर्य का ठिकाना नहीं था।
उन्होंने कहा - लेकिन मैं तो 6 महीने पहले मंदिर बन्द करके गया था और आज 6 महीने बाद आया हूँ। तुम छः महीने तक यहाँ पर जिन्दा कैसे रह सकते हो ? पंडित जी और सारी मंडली हैरान थी। इतनी सर्दी में एक अकेला व्यक्ति कैसे छः महीने तक जिन्दा रह सकता है। तब उस भक्त ने उनको सन्यासी बाबा के मिलने और उसके साथ की गयी सारी बाते बता दी। कि एक सन्यासी आया था - लम्बा था, बढ़ी-बढ़ी जटाये, एक हाथ में त्रिशुल और एक हाथ में डमरू लिए, मृग-शाला पहने हुआ था। पंडित जी और सब लोग उसके चरणों में गिर गये। बोले, हमने तो जिंदगी लगा दी किन्तु प्रभु के दर्शन ना पा सके, सच्चे भक्त तो तुम हो। तुमने तो साक्षात भगवान शिव के दर्शन किये है। उन्होंने ही अपनी योग-माया से तुम्हारे 6 महीने को एक रात में परिवर्तित कर दिया। काल-खंड को छोटा कर दिया। यह सब तुम्हारे पवित्र मन, तुम्हारी श्रद्वा और विश्वास के कारण ही हुआ है। हम आपकी भक्ति को प्रणाम करते है।

शनिवार, 29 दिसंबर 2018

दिसंबर 29, 2018

10 Best Hindi Suvichar


1- जीवन उतार-चढ़ाव  से भरा है इसकी आदत बना लो.

2- लोग तुम्हारे स्वाभिमान की परवाह नहीं करते इसलिए पहले खुद को साबित करके दिखाओ.

3- कॉलेज की पढ़ाई पूरी करने के बाद पाँच आंकड़े वाली पगार (Five Figure Salary) की मत सोचो, एक रात में कोई वाइस प्रेसिडेंट नहीं बनता. इसके लिए अपार मेहनत करनी पड़ती है.

4- अभी आपको अपने शिक्षक सख्त और डरावने लगते होंगे क्योंकि अभी तक आपके जीवन में बॉस नामक प्राणी से पाला नहीं पड़ा.

5- तुम्हारी गलती सिर्फ तुम्हारी है, तुम्हारी पराजय सिर्फ तुम्हारी है, किसी को दोष मत दो, अपनी गलती से सीखो और आगे बढ़ो.

6- तुम्हारे माता पिता तुम्हारे जन्म से पहले इतने नीरस और ऊबाऊ नही थे जितना तुम्हें अभी लग रहा है। तुम्हारे पालन पोषण करने में उन्होंने इतना कष्ट उठाया कि उनका स्वभाव बदल गया.

7- सांत्वना पुरस्कार सिर्फ स्कूल में देखने को मिलता है. कुछ स्कूलों में तो पास होने तक बार बार परीक्षा दी जा सकती है लेकिन बाहर की दुनिया के नियम अलग हैं, वहां हारने वाले को मौका नहीं मिलता.

8 – जीवन के स्कूल में कक्षाएं और वर्ग नहीं होते और वहां महीने भर की छुट्टी नहीं मिलती. आपको सिखाने के लिए कोई समय नहीं देता. यह सब आपको खुद करना होता है. सिखाने वाले मिल भी जाएँ तो यदि आप समय रहते न सीखे, तो वे भी सिखाने का धैर्य खो बैठते हैं।

 9 – TV का जीवन सही नहीं होता और जीवन TV के सीरियल नहीं होते. सही जीवन में आराम और रोमांस नहीं होता, सिर्फ काम और सिर्फ काम होता है।

10– लगातार पढ़ाई करने वाले और कड़ी मेहनत करने वाले अपने मित्रों को कभी मत चिढ़ाओ. एक समय ऐसा आएगा कि तुम्हें उसके नीचे काम करना पड़ेगा.

सोमवार, 20 अगस्त 2018

अगस्त 20, 2018

कर्म एक सीख

एक भिखारी रोज एक दरवाजें पर जाता और भिख के लिए आवाज लगाता, और जब घर मालिक बाहर आता तो उसे गंदी-गंदी गालिया और ताने देता, मर जाओ, काम क्यूं नही करतें, जीवन भर भीख मांगतें रहोगे, कभी-कभी गुस्सें में उसे धकेल भी देता, पर भिखारी बस इतना ही कहता, ईश्वर तुम्हारें पापों को क्षमा करें,
एक दिन सेठ बड़े गुस्सें में था, शायद व्यापार में घाटा हुआ था, वो भिखारी उसी वक्त भीख मांगने आ गया, सेठ ने आओ देखा ना ताओ, सीधा उसे पत्थर से दे मारा, भिखारी के सर से खून बहने लगा, फिर भी उसने सेठ से कहा ईश्वर तुम्हारें पापों को क्षमा करें, और वहां से जाने लगा, सेठ का थोड़ा गुस्सा कम हुआ, तो वहां सोचने लगा मैंने उसे पत्थर से भी मारा पर उसने बस दुआ दी, इसके पीछे क्या रहस्य है जानना पड़ेगा, और वहां भिखारी के पीछे चलने लगा,
भिखारी जहाँ भी जाता सेठ उसके पीछे जाता, कही कोई उस भिखारी को कोई भीख दे देता तो कोई उसे मारता, जालिल करता गालियाँ देता, पर भिखारी इतना ही कहता, ईश्वर तुम्हारे पापों को क्षमा करें, अब अंधेरा हो चला था, भिखारी अपने घर लौट रहा था, सेठ भी उसके पीछे था, भिखारी जैसे ही अपने घर लौटा, एक टूटी फूटी खाट पे, एक बुढिया सोई थी, जो भिखारी की पत्नी थी, जैसे ही उसने अपने पति को देखा उठ खड़ी हुई और भीख का कटोरा देखने लगी, उस भीख के कटोरे मे मात्र एक आधी बासी रोटी थी, उसे देखते ही बुढिया बोली बस इतना ही और कुछ नही, और ये आपका सर कहा फूट गया?
भिखारी बोला, हाँ बस इतना ही किसी ने कुछ नही दिया सबने गालिया दी, पत्थर मारें, इसलिए ये सर फूट गया, भिखारी ने फिर कहा सब अपने ही पापों का परिणाम हैं, याद है ना तुम्हें, कुछ वर्षो पहले हम कितने रईस हुआ करते थे, क्या नही था हमारे पास, पर हमने कभी दान नही किया, याद है तुम्हें वो अंधा भिखारी, बुढिया की ऑखों में ऑसू आ गये और उसने कहा हाँ,
कैसे हम उस अंधे भिखारी का मजाक उडाते थे, कैसे उसे रोटियों की जगह खाली कागज रख देते थे, कैसे हम उसे जालिल करते थे, कैसे हम उसे कभी_कभी मार वा धकेल देते थे, अब बुढिया ने कहा हाँ सब याद है मुजे, कैसे मैंने भी उसे राह नही दिखाई और घर के बनें नालें में गिरा दिया था, जब भी वहाँ रोटिया मांगता मैंने बस उसे गालियाँ दी, एक बार तो उसका कटोरा तक फेंक दिया,
और वो अंधा भिखारी हमेशा कहता था, तुम्हारे पापों का हिसाब ईश्वर करेंगे, मैं नही, आज उस भिखारी की बद्दुआ और हाय हमें ले डूबी,
फिर भिखारी ने कहा, पर मैं किसी को बद्दुआ नही देता, चाहे मेरे साथ कितनी भी जात्ती क्यू ना हो जाए, मेरे लब पर हमेशा दुआ रहती हैं, मैं अब नही चाहता, की कोई और इतने बुरे दिन देखे, मेरे साथ अन्याय करने वालों को भी मैं दुआ देता हूं, क्यूकि उनको मालूम ही नही, वो क्या पाप कर रहें है, जो सीधा ईश्वर देख रहा हैं, जैसी हमने भुगती है, कोई और ना भुगते, इसलिए मेरे दिल से बस अपना हाल देख दुआ ही निकलती हैं,
सेठ चुपके_चुपके सब सुन रहा था, उसे अब सारी बात समझ आ गयी थी, बुढे-बुढिया ने आधी रोटी को दोनो मिलकर खाया, और प्रभु की महिमा है बोल कर सो गयें,
अगले दिन, वहाँ भिखारी भिख मांगने सेठ कर यहाँ गया, सेठ ने पहले से ही रोटिया निकल के रखी थी, उसने भिखारी को दी और हल्की से मुस्कान भरे स्वर में कहा, माफ करना बाबा, गलती हो गयी, भिखारी ने कहा, ईश्वर तुम्हारा भला करे, और वो वहाँ से चला गया,
सेठ को एक बात समझ आ गयी थी, इंसान तो बस दुआ-बद्दुआ देते है पर पूरी वो ईश्वर वो जादूगर कर्मो के हिसाब से करता हैं,,,,,,,,

हो सके तो बस अच्छा करें, वो दिखता नही है तो क्या हुआ, सब का हिसाब पक्का रहता है उसके पास
अगस्त 20, 2018

मित्रता की परिभाषा

एक बेटे के अनेक मित्र थे जिसका उसे बहुत घमंड था। पिता का एक ही मित्र था लेकिन था सच्चा ।एक दिन पिता ने बेटे को बोला कि तेरे बहुत सारे दोस्त है उनमें से आज रात तेरे सबसे अच्छे दोस्त की परीक्षा लेते है। बेटा सहर्ष तैयार हो गया।
रात को 2 बजे दोनों बेटे के सबसे घनिष्ठ मित्र के घर पहुंचे, बेटे ने दरवाजा खटखटाया, दरवाजा नहीं खुला,बार-बार दरवाजा ठोकने के बाद अंदर से बेटे का दोस्त उसकी माताजी को कह रहा था माँ कह दे मैं घर पर नहीं हूँ।यह सुनकर बेटा उदास हो गया, अतः निराश होकर दोनों लौट आए।
फिर पिता ने कहा कि बेटे आज तुझे मेरे दोस्त से मिलवाता हूँ। दोनों पिता के दोस्त के घर पहुंचे। पिता ने अपने मित्र को आवाज लगाई। उधर से जवाब आया कि ठहरना मित्र, दो मिनट में दरवाजा खोलता हूँ। जब दरवाजा खुला तो पिता के दोस्त के एक हाथ में रुपये की थैली और दूसरे हाथ में तलवार थी।
पिता ने पूछा, यह क्या है मित्र। तब मित्र बोला....अगर मेरे मित्र ने दो बजे रात्रि को मेरा दरवाजा खटखटाया है, तो जरूर वह मुसीबत में होगा और अक्सर मुसीबत दो प्रकार की होती है,या तो रुपये पैसे की या किसी से विवाद हो गया हो। अगर तुम्हें रुपये की आवश्यकता हो तो ये रुपये की थैली ले जाओ और किसी से झगड़ा हो गया हो तो ये तलवार लेकर मैं तुम्हारें साथ चलता हूँ। तब पिता की आँखे भर आई और उन्होंने अपने मित्र से कहा कि, मित्र मुझे किसी चीज की जरूरत नहीं, मैं तो बस मेरे बेटे को  मित्रता और दोस्ती की परिभाषा समझा रहा था ताकि ये समझ पाए की असली दोस्ती क्या होती है

शुक्रवार, 3 अगस्त 2018

अगस्त 03, 2018

Best Inspirational Quotes in Hindi


"शब्द" और "सोच" दूरिया बढा देते है  क्योंकि
कभी हम "समझ" नही पाते, और कभी "समझा" नही पाते...

"यूँ तो "शब्द" मुफ्त में मिलते हैं 
लेकिन उनके चयन पर "निर्भर"करता है,
कि उनकी "कीमत" मिलेगी या "चुकानी" पड़ेगी"

ईश्वर हमें कभी भी किसी चीज की सजा नहीं देते.
जिंदगी में हमारे कर्म ही हमें सजा देते है...

जिन्दगी में तर्क और तलवार से केवल बहस और युद्ध जीते जा सकते हैं,
किसी भी व्यक्ति का दिल जीतने के लिए तो प्रेम और सद्भाव ही चाहिए।

सिर्फ आसमान छू लेना ही कामयाबी नहीं है।
असली कामयाबी तो वो है की 
आसमान भी छू लो और पॉव भी जमीन पर हो।

"जिंदगी में दो तथ्य हमारे व्यक्तित्व को परिभाषित करते हैं,
एक हमारा धीरज जब हमारे पास कुछ न हो।
दूसरा हमारा व्यवहार जब हमारे पास सब कुछ हो।।"

कोशिश करो कि जिँदगी का हर लम्हा 
अपनी तरफ से हर किसी के साथ अच्छे से गुजरे,
क्योकि, जिन्दगी नहीं रहती पर 
अच्छी यादें हमेशा जिन्दा रहती हैं....

ना ही कद बड़ा होता है और ना ही पद बड़ा होता है
बड़ा वो होता है जो मुसीबत में एक दूसरे के लिये हमेशा खड़ा होता है

मनुष्य का असली चरित्र तब सामने आता है..
जब वो नशे में होता है!
फिर नशा चाहे धन का हो, पद का हो, रूप का हो या शराब का !!

फूंक मारकर हम दिए को बुझा सकते है पर अगरबत्ती को नहीं,
क्योंकि जो महकता है उसे कौन बुझा सकता है
और जो जलता है वह खुद बुझ जाता है।

"_दर्द भी कितना खुशनसीब है 
जिसे पा कर लोग अपनों को याद करते है,
दौलत भी कितनी बदनसीब है 
जिसे पा कर लोग अक्सर अपनों को भूल जाते है.."

किस भी समाज में बदलाव क्यों नही आता 
क्योंकि गरीब में हिम्मत नही होती..
मध्यम को फुरसत नही होती, 
और अमीर को जरूरत नही होती...

बुधवार, 1 अगस्त 2018

अगस्त 01, 2018

स्टीव जॉब्स के अनमोल विचार ! Steve Jobs Quotes in Hindi

_आप ग्राहक से पूंछकर उसकी पसंद के उत्पाद नहीं बना सकते क्योंकि जब तक आप वो बनाएंगे वो कुछ नया चाहने लगेंगे।_
"आप ग्राहक से पूंछकर उसकी पसंद के उत्पाद नहीं बना सकते
क्योंकि जब तक आप वो बनाएंगे वो कुछ नया चाहने लगेंगे।"

_कभी-कभी ज़िन्दगी आपके सर पर ईंट से वार करेगी अपना विश्वास मत खोइए._
"कभी-कभी ज़िन्दगी आपके सर पर ईंट से वार करेगी अपना विश्वास मत खोइए."

_यह निश्चय करना की आपको क्या नहीं करना है उतना ही महत्त्वपूर्ण है जितना की यह निश्चय करना की आप को क्या करना है।_
"यह निश्चय करना की आपको क्या नहीं करना है उतना ही महत्त्वपूर्ण है
जितना की यह निश्चय करना की आप को क्या करना है।"

अगर आप हर दिन ऐसे जियें जैसे कि वो आपकी ज़िन्दगी का आखिरी दिन है, तो एक दिन आप ज़रूर सही हो जायेंगे.
अगर आप हर दिन ऐसे जियें जैसे कि वो आपकी ज़िन्दगी का आखिरी दिन है,
तो एक दिन आप ज़रूर सही हो जायेंगे.

जब आप समुद्री डांकू बन सकते है तो फिर नौसेना में जाने कि क्या ज़रुरत है_
जब आप समुद्री डांकू बन सकते है तो फिर नौसेना में जाने कि क्या ज़रुरत है?

जो इतने पागल होते हैं कि उन्हें लगता है वे दुनिया बदल सकते हैं, अक्सर बदल देते हैं.
जो इतने पागल होते हैं कि उन्हें लगता है
वे दुनिया बदल सकते हैं, अक्सर बदल देते हैं.

नयी खोज एक लीडर और एक अनुयायी के बीच अंतर करती है।
नयी खोज एक लीडर और एक अनुयायी के बीच अंतर करती है।

महत्वपूर्ण होने के लिए चीजों का दुनिया बदलना ज़रूरी नहीं है.
महत्वपूर्ण होने के लिए चीजों का दुनिया बदलना ज़रूरी नहीं है.

महान काम करने का केवल एक ही तरीका है, वो करो जिसे तुम करना पसंद करते हो. अगर तुम्हे अभी तक वो नहीं मिला है, तो खोजते रहो. समझौता मत करो.
महान काम करने का केवल एक ही तरीका है, वो करो जिसे तुम करना पसंद करते हो.
अगर तुम्हे अभी तक वो नहीं मिला है,  तो खोजते रहो. समझौता मत करो.

महान कार्ये करने का एक मात्र तरीका यह है की आप अपने काम से प्यार करे।
महान कार्ये करने का एक मात्र तरीका यह है
की आप अपने काम से प्यार करे।

यदि आप वास्तव में बहुत बारीकी से देखोगे तो आप पाओगे की रातो रात मिलने वाली अधिकतर सफलताओ में बहुत लम्बा वक़्त लगा है।
यदि आप वास्तव में बहुत बारीकी से देखोगे तो
आप पाओगे की रातो रात मिलने वाली अधिकतर सफलताओ में बहुत लम्बा वक़्त लगा है।

शनिवार, 28 जुलाई 2018

जुलाई 28, 2018

गुरु बिन ज्ञान नही


यह बात तो सच है, गुरु बिन ज्ञान नहीं मिलता। अर्जुन को द्रोण ने, चन्द्रगुप्त को चाणक्य ने, विवेकानंद को परमहंस ने, कृष्ण को संदीपनी ने आदि महानता के शिखर पर पहुचाया। गुरु सहज ही तुम्हारे अज्ञान रूपी पर्दो को हटाकर तुम्हे तुम्हारे ज्ञान से परिचित करवाता है।
एक सच्चा शिष्य भी अपनी सारी काबिलियत का श्रेय अपने गुरुजनों को देता है। एकलव्य का झुकना और सहर्ष अंगूठा काटकर देना, गुरु के प्रति सच्ची श्रद्धा को व्यक्त करता है।
हरि रूठे गुरु ठौर है, गुरु रूठे नहि ठौर।
वेदों ने गुरु की महिमा का बखान बहुत ही मार्मिक किया है। देवताओ में भी बृहस्पति को और राक्षसो ने शुक्राचार्य को अपना गुरु माना है।
गुरु तुम्हे अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाता है। कबीरदास गुरु से कई गुना ज्ञानी थे, फिर भी उन्होंने गुरु का वरण किया। विद्या विनय का दूसरा नाम है। विद्याविहीन पशु के समान माना गया है। अतः गुरुजनों के प्रति सच्ची श्रद्धा बरतें, क्यू कि गुरुबिन ज्ञान नहीं

गुरुवार, 26 जुलाई 2018

जुलाई 26, 2018

Best Inspire Quotes in Hindi

ज़िंदगी की रेस में जो लोग आपको ‘दौड़ कर’ नहीं हरा पाते... वही लोग आपको ‘तोड़ कर’ हराने की कोशिश करते हैं..!
ज़िंदगी की रेस में जो लोग आपको ‘दौड़ कर’ नहीं हरा पाते...
वही लोग आपको ‘तोड़ कर’ हराने की कोशिश करते हैं..!

_किस्मत सखी नहीं फिर भी रुठ जाती है बुद्वि लोहा नही फिर भी जंग लग जाती है आत्म सम्मान शरीर नहीं फिर भी घायल हो जाता है और.. इन्सान मौसम नही फिर भी बदल जाता है_
किस्मत सखी नहीं फिर भी रुठ जाती है
बुद्वि लोहा नही फिर भी जंग लग जाती है
आत्म सम्मान शरीर नहीं फिर भी घायल हो जाता है
और..
इन्सान मौसम नही फिर भी बदल जाता है

चलने वाले पैरों में कितना फर्क है, एक आगे तो एक पीछे. पर ना तो आगे वाले को _अभिमान_ है, और ना पीछे वाले को _अपमान_ क्योंकि उन्हें पता होता है कि पलभर में यह बदलने वाला होता है इसी को
चलने वाले पैरों में कितना फर्क है, एक आगे तो एक पीछे.
पर ना तो आगे वाले को अभिमान है,
और ना पीछे वाले को अपमान
क्योंकि उन्हें पता होता है कि पलभर में यह बदलने वाला होता है
इसी को जिंदगी कहते है

जिंदगी में समस्याएँ तो हर दिन नयी-नयी खड़ी हो जाती हैंमगर जीतते वही लोग है जिनकी सोच हमेशा बड़ी होती है
जिंदगी में समस्याएँ तो हर दिन नयी-नयी खड़ी हो जाती हैं
मगर जीतते वही लोग है जिनकी सोच हमेशा बड़ी होती है

लोग कहते हैं बेटियों का कोई घर नहीं होता , बेवकूफ हैं वो लोग क्योंकि बेटियों के बिना कोई घर ही नहीं होता
लोग कहते हैं बेटियों का कोई घर नहीं होता ,
बेवकूफ हैं वो लोग क्योंकि बेटियों के बिना कोई घर ही नहीं होता

हमेशा हर रिश्ते मैं चंद फासले होना जरुरी है क्योंकि हमेशा दो चीजे जितना भी भुलाना चाहो नही भूली जाती है एक “घाव” और दूसरा “लगाव”
हमेशा हर रिश्ते मैं चंद फासले होना जरुरी है
क्योंकि हमेशा दो चीजे जितना भी भुलाना चाहो नही भूली जाती है
एक “घाव” और दूसरा “लगाव”

चापलूस और आलोचक में इतना बड़ा अंतर होता है, कि चापलूस अच्छा बनकर बुरा करता है... और आलोचक बुरा बनकर अच्छा करता है..
चापलूस और आलोचक में इतना बड़ा अंतर होता है,
कि चापलूस अच्छा बनकर बुरा करता है...
और आलोचक बुरा बनकर अच्छा करता है..

_ज़िंदगी उसी को आज़माती है जो हर मोड़ पर चलना जानता है कुछ _पाकर_ तो हर कोई मुस्कुराता है, ज़िंदगी शायद उनकी ही होती है जो बहुत कुछ _खोकर_ भी मुस्कुराना जानता है_
"ज़िंदगी उसी को आज़माती है जो हर मोड़ पर चलना जानता है
कुछ "पाकर" तो हर कोई मुस्कुराता है,
ज़िंदगी शायद उनकी ही होती है
जो बहुत कुछ "खोकर" भी मुस्कुराना जानता है"

_जिंदगी में कभी-कभी रिश्तों की कीमत वो लोग समझा देते हैं जिनसे हमारा कोई रिश्ता ही नहीं होता_
"जिंदगी में कभी-कभी रिश्तों की कीमत वो लोग समझा देते हैं
जिनसे हमारा कोई रिश्ता ही नहीं होता"

_जो रिश्ते सच में गहरे होते हैं वो कभी अपनेपन का शोर नहीं मचाते सच्चे रिश्ते शब्दों से नहीं दिल और आंखो से बात करते हैं_
"जो रिश्ते सच में गहरे होते हैं वो कभी अपनेपन का शोर नहीं मचाते
सच्चे रिश्ते शब्दों से नहीं दिल और आंखो से बात करते हैं"

“यदि आप यह मानते हैं कि आप कर सकते हैं तो संभवतः आप कर सकते हैं यदि यह सोचते हैं कि आप नहीं कर सकते तो आप सुनिश्चित रुप से नहीं कर सकते विश्वास वह है जो आपको आगे बढ़ाता है।_
“यदि आप यह मानते हैं कि आप कर सकते हैं तो संभवतः आप कर सकते हैं
यदि यह सोचते हैं कि आप नहीं कर सकते तो आप सुनिश्चित रुप से नहीं कर सकते
विश्वास वह है जो आपको आगे बढ़ाता है।"

अपनी _आदतों_ के अनुसार चलने में इतनी _गलतियां_ नहीं होती जितना _दुनिया_ का ख्याल और _लिहाज़_ रखकर चलने में होती है
अपनी "आदतों" के अनुसार चलने में इतनी "गलतियां" नहीं होती
जितना "दुनिया" का ख्याल और "लिहाज़" रखकर चलने में होती है

बुधवार, 25 जुलाई 2018

जुलाई 25, 2018

जिंदगी का सच


कल मैं दुकान से जल्दी घर चला आया। आम तौर पर रात में 10 बजे के बाद आता हूं, कल 8 बजे ही चला आया।
सोचा था घर जाकर थोड़ी देर पत्नी से बातें करूंगा, फिर कहूंगा कि कहीं बाहर खाना खाने चलते हैं। बहुत साल पहले, , हम ऐसा करते थे।
घर आया तो पत्नी टीवी देख रही थी। मुझे लगा कि जब तक वो ये वाला सीरियल देख रही है, मैं कम्यूटर पर कुछ मेल चेक कर लूं। मैं मेल चेक करने लगा, कुछ देर बाद पत्नी चाय लेकर आई, तो मैं चाय पीता हुआ दुकान के काम करने लगा।
अब मन में था कि पत्नी के साथ बैठ कर बातें करूंगा, फिर खाना खाने बाहर जाऊंगा, पर कब 8 से 11 बज गए, पता ही नहीं चला।
पत्नी ने वहीं टेबल पर खाना लगा दिया, मैं चुपचाप खाना खाने लगा। खाना खाते हुए मैंने कहा कि खा कर हम लोग नीचे टहलने चलेंगे, गप करेंगे। पत्नी खुश हो गई।
हम खाना खाते रहे, इस बीच मेरी पसंद का सीरियल आने लगा और मैं खाते-खाते सीरियल में डूब गया। सीरियल देखते हुए सोफा पर ही मैं सो गया था।
जब नींद खुली तब आधी रात हो चुकी थी। बहुत अफसोस हुआ। मन में सोच कर घर आया था कि जल्दी आने का फायदा उठाते हुए आज कुछ समय पत्नी के साथ बिताऊंगा। पर यहां तो शाम क्या आधी रात भी निकल गई।
ऐसा ही होता है, ज़िंदगी में। हम सोचते कुछ हैं, होता कुछ है। हम सोचते हैं कि एक दिन हम जी लेंगे, पर हम कभी नहीं जीते। हम सोचते हैं कि एक दिन ये कर लेंगे, पर नहीं कर पाते।
आधी रात को सोफे से उठा, हाथ मुंह धो कर बिस्तर पर आया तो पत्नी सारा दिन के काम से थकी हुई सो गई थी। मैं चुपचाप बेडरूम में कुर्सी पर बैठ कर कुछ सोच रहा था।
पच्चीस साल पहले इस लड़की से मैं पहली बार मिला था। पीले रंग के शूट में मुझे मिली थी। फिर मैने इससे शादी की थी। मैंने वादा किया था कि सुख में, दुख में ज़िंदगी के हर मोड़ पर मैं तुम्हारे साथ रहूंगा।
पर ये कैसा साथ? मैं सुबह जागता हूं अपने काम में व्यस्त हो जाता हूं। वो सुबह जागती है मेरे लिए चाय बनाती है। चाय पीकर मैं कम्यूटर पर संसार से जुड़ जाता हूं, वो नाश्ते की तैयारी करती है। फिर हम दोनों दुकान के काम में लग जाते हैं, मैं दुकान के लिए तैयार होता हूं, वो साथ में मेरे लंच का इंतज़ाम करती है। फिर हम दोनों भविष्य के काम में लग जाते हैं।
मैं एकबार दुकान चला गया, तो इसी बात में अपनी शान समझता हूं कि मेरे बिना मेरा दुकान का काम नहीं चलता, वो अपना काम करके डिनर की तैयारी करती है।
देर रात मैं घर आता हूं और खाना खाते हुए ही निढाल हो जाता हूं। एक पूरा दिन खर्च हो जाता है, जीने की तैयारी में।
वो पंजाबी शूट वाली लड़की मुझ से कभी शिकायत नहीं करती। क्यों नहीं करती मैं नहीं जानता। पर मुझे खुद से शिकायत है। आदमी जिससे सबसे ज्यादा प्यार करता है, सबसे कम उसी की परवाह करता है। क्यों?
कई दफा लगता है कि हम खुद के लिए अब काम नहीं करते। हम किसी अज्ञात भय से लड़ने के लिए काम करते हैं। हम जीने के पीछे ज़िंदगी बर्बाद करते हैं।
कल से मैं सोच रहा हूं, वो कौन सा दिन होगा जब हम जीना शुरू करेंगे। क्या हम गाड़ी, टीवी, फोन, कम्यूटर, कपड़े खरीदने के लिए जी रहे हैं?
मैं तो सोच ही रहा हूं, आप भी सोचिए
कि ज़िंदगी बहुत छोटी होती है। उसे यूं जाया मत कीजिए। अपने प्यार को पहचानिए। उसके साथ समय बिताइए। जो अपने माँ बाप भाई बहन सागे संबंधी सब को छोड़ आप से रिश्ता जोड़ आपके सुख-दुख में शामिल होने का वादा किया उसके सुख-दुख को पूछिए तो सही।
एक दिन अफसोस करने से बेहतर है, सच को आज ही समझ लेना कि ज़िंदगी मुट्ठी में रेत की तरह होती है। कब मुट्ठी से वो निकल जाएगी, पता भी नहीं चलेगा।